कंप्यूटर क्या है (what is Computer)

कंप्यूटर क्या है

कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो तीव्र गति से कार्य करता है और कोई गलती नहीं करता है इसके क्षमता सीमित होती है या अंग्रेजी शब्द कंप्यूट से मिलकर बना है जिसका अर्थ गाना करना होता है हिंदी में इसे संगणक कहते हैं इसका उपयोग बहुत सारे सूचनाओं को प्रोसेस करने तथा इकट्ठा करने के लिए होता है कंप्यूटर एक यंत्र है जो डाटा को ग्रहण करता है वह इसके सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम के अनुसार किसी परिणाम के लिए प्रोसेस करता है

अगर कहां जाए तो कंप्यूटर को कृत्रिम बुद्धि की संज्ञा दी गई है और इसकी स्मरण शक्ति मनुष्य की तुलना में उच्च होती है

कंप्यूटर संबंधीय प्रारंभिक शब्द (elementary words relating to computer)

डेटा यह अव्यवस्थित आंकड़ा या तथ्य है या प्रोसेस के पहले कीअवस्था है जिससे डेटा कहते हैं 

साधारणत: डेटा को दो भागों में बांटा गया है

  1. संख्यात्मक डेटा (Numerical Data)
  2. अल्फा न्यूमैरिक डेटा (Alphanumeric Data)

1. संख्यात्मक डेटा (Numerical Data) : इस तरह के डेटा में 0 से 9 तक के अंकों का प्रयोग किया जाता है जैसे कि कर्मचारियों का वेतन इत्यादि |

2.अल्फा न्यूमैरिक डेटा (Alphanumeric Data)  : इस तरह के डेटा में अंको अक्षरों तथा चिन्हों का उपयोग किया जाता है जैसे किसी की पता इत्यादि 

सूचना ( Information) : यह अव्यवस्थित डेटा का प्रोसेस करने के बाद प्राप्त परिणाम है जो व्यवस्थित होता है

कंप्यूटर की विशेषताएं |
(Characteristics of Computer)

  1. यह तीव्र गति से कार्य करता है अर्थात समय की बचत होती है |
  2. यह त्रुटि रहित कार्य करता है
  3. यह स्थाई तथा विशाल भंडारण की सुविधा देता है 
  4. यह पूर्ण निर्धारित निर्देशों के अनुसार तीव्र निर्णय लेने में सक्षम है |

कंप्यूटर का उपयोग | ( Use of Computer)

  1. शिक्षा के क्षेत्र में (In Education)
  2. वैज्ञानिक अनुसंधान में (In Scientific Research)
  3. रेलवे तथा वायु आरक्षण में (In Railway and Airlines Reservation)
  4. बैंक में (In Bank)
  5. चिकित्सा विज्ञान में (In Medical Science)
  6. रक्षा के क्षेत्र में (In Defence)
  7. प्रशासन में (In Administration)
  8. प्रकाशन में ( In Publication)
  9. व्यापार में (In Business)
  10. संचार में ( In Communication)
  11. मनोरंजन में ( In Recreation)

कंप्यूटर के कार्य (Function of Computer)

  1. डेटा संकलन ( Data Collection)
  2. डेटा संचयन ( Data Storage)
  3. डेटा संसाधन (Data Processing)
  4. डेटा निर्गमन (Data Output)

डेटा प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग (Data processing and electronic data processing)

कंप्यूटर के निर्माण से पहले निश्चित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डेटा का संकलन, संचयन, संसाधन और निर्गमन हस्तचालित विधि से होता था जिसे डाटा प्रोसेसिंग कहते थे जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास हुआ इन सभी कार्यों के लिए कंप्यूटर का उपयोग होने लगा इसे इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग (E.D.P) कहते हैं |

कंप्यूटर सिस्टम ( Computer System)

यह उपकरणों का एक समूह है जो एक साथ मिलकर डेटा प्रोसेस करते हैं कंप्यूटर सिस्टम में अनेक इकाइयां होती है जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग में होता है बुनियादी कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र में इनपुट प्रोसेसिंग और आउटपुट शामिल है

  1. इनपुट यूनिट (Input Unit) : इनपुट यूनिट वैसे इकाई है जो यूजर से डेटा प्राप्त कर सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट को इलेक्ट्रॉनिक पल्स के रूप में प्रवाहित (Transmit) करता है जैसा की ऑटोमेटिक टेलर मशीन (Automatic Teller Machine – ATM)  में जब हम निकासी के लिए जाते हैं तो हमें पिन नंबर (PIN- Personal Identification Number) डालना होता है उसके लिए इनपुट इकाई के रूप में कीपैड का उपयोग किया जाता है (GIGO – Garbage in garbage out) कंप्यूटर विज्ञान में एक concept है जो बताता है की इनपुट की एक्यूरेसी पर आउटपुट की एक्यूरेसी निर्भर करती है |
  2. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट( CPU ) इसे प्रोसेसर भी कहते हैं यह एक इलेक्ट्रॉनिक माइक्रोचिप है जो डाटा को इनफॉरमेशन में बदलते हुए प्रोसेस करता हैं इसे कंप्यूटर का ब्रेन कहा जाता है यह कंप्यूटर सिस्टम के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा यह इनपुट को आउटपुट में रूपांतरित करता है | यह इनपुट यूनिट तथा आउटपुट यूनिट से मिलकर कम्प्यूटर सिस्टम बनाता है इसके अग्रलिखित भाग होते हैं |

     a. अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit या ALU ) इसका उपयोग अंकगणितीय तथा तार्किक गणना में होता है अंकगणित गणना के अंतर्गत जोड़ घटाव गुणा और भाग इत्यादि तथा तार्किक गणना के अंतर्गत तुलनात्मक गणना जैसे (<,> या = ) हां या ना इत्यादि आते हैं |

     b. कंट्रोल यूनिट (Control Unit ) यह कंप्यूटर के सारे कार्यों को नियंत्रित करता है तथा कंप्यूटर के सारे भागों जैसे – इनपुट, आउटपुट डिवाइसेज प्रोसेसर इत्यादि के सारे गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाता है | 

     c. मेमोरी यूनिट (Memory unit) यह डेटा तथा निर्देशों के संग्रह करने में प्रयुक्त होता है इसे मुख्यता : दो वर्गों प्राइमरी तथा सेकेंडरी मेमोरी में विभाजित किया जाता है जब कंप्यूटर कार्यशील रहता है अर्थात वर्तमान में उपयोग हो रहे डेटा तथा निर्देश का संग्रह प्राइमरी मेमोरी (रजिस्टर) में होता है सेकेंडरी मेमोरी का उपयोग बाग ( Later ) में उपयोग होने वाले डेटा तथा निर्देशों को संग्रहित करने में होता है

     d. आउटपुट यूनिट (Output Unit ) :-वैसी इकाई जो सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट से डाटा लेकर उसे यूजर को समझने योग बनाता है जैसा कि जब हम सुपरमार्केट में बिल अदा करते हैं तो हमें रशीद प्राप्त होता है जो एक आउटपुट का रूप है या आउटपुट उपकरण प्रिंटर से प्राप्त होता है

  1. …………………..एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो डेटा को इनफॉरमेशन में कन्वर्ट करते हुए प्रक्रिया करता है।

A. प्रोसेसर
B.कंप्यूटर
C.स्टाइलस
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- A

2. कंप्यूटर प्रोसेस द्वारा …………………….इनफॉरमेशन में परिवर्तित किए जाते हैं

A. नंबर
B. प्रोसेसर
C. इनपुट
D. डेटा
E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- D

3. सीपीयू का वह भाग जो अन्य सभी कंप्यूटर कंपोनेंटस की गतिविधियों को कोआर्डिनेट करता है वह निम्नलिखित में कौन है –

A. मदरबॉर्ड
B. कोऑडिर्नेशन
C. कंट्रोल यूनिट
D. एरिथमैटिक लॉजिक यूनिट
E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- C

4. इनपुट का आउटपुट में रूपांतरण…………………… द्वारा किया जाता है। 

A. पेरिफरल्स
B. मेमोरी
C. स्टोरेज
D. इनपुट आउटपुट यूनिट
E. CPU 

उत्तर :- E

5. कंप्यूटर में डेटा किसे कहा जाता है।

A. संख्या को
B. चिन्ह को
C. दी गई सूचनाओं को
D. चिन्ह व संख्यात्मक सूचना को
E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- D

6. कंप्यूटर का दिमाग कहलाता है। 

A. सीपीयू
B. मॉनिटर
C. मोडेम
D. सॉफ्टवेयर
E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- A

7. कंप्यूटर के मस्तिष्क को कहा जाता है। 

A. स्मृति
B. कुंजी पटल
C. सी० पी० यु०
D. हार्ड डिस्क
E.  इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- C

8. कंप्यूटर –
1. आंकड़ों के भंडारण करने वाली एक सक्षम युक्ति है
2. आंकड़ों के विश्लेषण करने के लिए सक्षम है
3. पूर्ण गोपनीयता बनाए रखने में सक्षम है
4. कभी-कभी वायरस द्वारा आक्रमित होता है
नीचे दिए गए कूट में से सभी उत्तर का चयन कीजिए – 

A. 1और 2

B. 1,2 और  3

C. 1,2 और  4

D. सभी चारों 

E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- D

9. किसी व्यवस्था के कंप्यूटरीकरण में आवश्यकता होती है –

  1. उसको करने में दृढ़ इच्छा शक्ति की
  2. संबंधित वित्तीय संसाधनों की
  3. जनशक्ति के प्रशिक्षण की
  4. एक अत्यधुनिक संरचना की

नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-

A. 1और 2

B. 2और 3

C. 1,2 और 4

D. सभी चारों 

E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- D

10. कंप्यूटर के संदर्भ में A.L.U. का तात्पर्य है –

A. एल्जेब्रिक लॉजिक यूनिट
B. अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट
C. एलजेब्रिक लोकल यूनिट
D. अरिथमेटिक लोकल यूनिट
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- B

11……………… कंप्यूटर द्वारा प्रोड्यूस किया गया परिणाम है। 

A. डेटा 

B.मेमोरी

C.आउटपुट 

D.इनपुट 

E.इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :-C

12. इनफॉरमेशन सिस्टम में अल्फा न्यूमैरिक डाटा सामान्यत: क्या रूप लेता है। 

A. वाक्य और पैराग्राफ
B. नंबर और अल्फाबेटिकल करैक्टर
C. ग्राफ़िक शेष और फिर
D. मानव – ध्वनि और अन्य ध्वनियाँ
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- B

13. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट में एक कंपोनेंट के रूप में निम्न में से कौन सा होता है 

A.मेमोरी रेगुलेशन यूनिट
B. फ्लो कण्ट्रोल यूनिट
C. अरिथमैटिक लॉजिक यूनिट
D. इंस्ट्रक्शन मेनिपुलेशन यूनिट
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- C

14…………. कच्चे तथ्य (रॉ फॉट्स) बताता है जबकि……….. से डाटा अर्थपूर्ण बन जाता है। 

A. सुचना,रिपोर्टिंग
B. डाटा , सुचना
C. सुचना ,बिट्स
D. रिकॉर्ड ,बाईटस
E. बिट्स ,बाईटस 

उत्तर :- B

15. शब्द ,आवाज,इमेजस और ऐसे कार्यों को अनूदित करना जिसे लोग सिस्टम यूनिट प्रोसेस करने वाले प्रारूप में समझ सकते हैं उसे…………………… के रूप में जाना जाता है। 

A. डिवाइज ड्राइवर्स
B. डिवाइस रीडर्स
C. इनपुट डिवाइजीस
D. आउटपुट डिवाइजीस
E. इनमे से कोई नहीं।

उत्तर :- C

16. कंप्यूटर प्रोसेसर में निम्न भाग सम्मिलित हैं ……………….

A. सीपीयू व् प्रमुख मेमोरी
B. हार्ड डिस्क व् फ्लॉपी ड्राइव
C. प्रमुख मेमोरी और स्टोरेज
D. ऑपरेटिंग प्रणाली व आप्लिकेशन
E. कण्ट्रोल यूनिट व ALU 

उत्तर :- E

17. माइक्रोप्रोसेसर जो कंप्यूटर का मस्तिष्क होता है उसे …………………..भी कहा जाता है 

A. माइक्रोचिप
B. मॅक्रोचिप
C. मॅक्रोप्रोसेसर
D. कॅल्क्युलेटर
E. सॉफ्टवेयर 

उत्तर :- A

18. प्रमुख मेमोरी …………………….के समन्वय से कार्य करती है। 

A. विशेष कार्य कार्ड
B. आर ए एम् ( RAM)
C. सीपीयू (CPU)
D. इंटेल
E. ये सभी

उत्तर :- C

19. सीपीयू का प्रमुख कार्य है ……..

A. प्रोग्राम अनुदेशों पर अमल करना
B. डाटा/जानकारी भावी प्रयोग हेतु स्टोर करना
C. डाटा और जानकारी प्रोसेस करना

D. दोनों (A) व (C)
E. इनमे से कोई नहीं

20. जब कंप्यूटर इनपुट और आउटपुट की बात होती है तब इनपुट का संदर्भ है ……………

A. कोई भी डाटा प्रोसेसिंग जो नए डाटा इनपुट से कंप्यूटर में होता है।
B. डाटा या जानकारी पुन: प्राप्त करना जिसे कंप्यूटर में इनपुट किया गया है 
C. डाटा यह जानकारी जिसे कंप्यूटर में एंटर/प्रतिशत किया गया है
D. डाटा का प्रेषण जिसे कंप्यूटर में इनपुट किया गया है 
E. उपर्युक्त (C) व (D) दोनों

उत्तर :- E

21. सभी तार्किक एवं गणितीय परिकलन जो कंप्यूटर द्वारा किए गए हो ,कंप्यूटर पर / में होते हैं……………….

A. प्रणाली बोर्ड
B. केंद्रीय नियंत्रक यूनिट
C. सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट
D. मदर बोर्ड
E. मेमोरी 

उत्तर :- C 

22. अर्थमैटिक ऑपरेशन ……………..

A. में यह जानने के लिए एक डाटा आइटम का दूसरी डाटा आइटम से मिलान किया जाता है कि पहले आइटम दूसरी आइटम से बड़ी, बराबर या कम है। 

B. डाटा आइटमों को आरोही या अवरोही क्रम में मानक, पूर्व निर्धारित क्राइटेरिया के अनुसार शॉर्ट करते हैं। 

C. AND,OR तथा NOT जैसे ऑपरेटरो के साथ कंडिशनो का प्रयोग करते हैं। 

D. में जमा, घटाव , गुना और भाग होता है। 

E. इनमे से कोई नहीं 

उत्तर :- D

23. इनपुट ,आउटपुट और प्रोसेसिंग डिवाइसों का समूह ………………………….का निरूपण करता है। 

A. मोबाइल डिवाइस 

B. इनफार्मेशन प्रोसेसिंग साइकल 

C. सर्किट बोर्ड 

D. कंप्यूटर सिस्टम 

E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :-  D

24. कंप्यूटर निम्नलिखित में से कौन सा कार्य नहीं करता है।  

A. इंप्यूटिंग

B. प्रोसेसिंग 

C. कंट्रोलिंग 

D. अंडरस्टैंडिंग 

E. ऑउटपुटिंग 

उत्तर :- D

25. कंप्यूटर में अधिकांश प्रोसेसिंग………………… में होती है

A. मेमोरी
B. रैम
C. मदरबोर्ड
D. सीपीयू
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- D

26. ए एल यू ………………परिचालन संपन्न करता है। 

A. लॉगरिदम आधारित
B. ASCII
C. एल्गोरिदम आधारित
D. अर्थमेटिक
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- D

27. निम्न में से कौन सा कंप्यूटर का बुनियादी कार्य नहीं करता है ?

A. डाटा को स्वीकार करना और प्रोसेस करना
B. इनपुट को स्वीकार करना
C. डाटा को प्रोसेस करना
D. डाटा को स्टोर करना
E. टेक्स्ट को स्कैन करना

उत्तर :- E

28. किसी बाहरी स्रोत से आती है और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में फीड की जाती है उसे सूचना को…………………… कहते हैं 

A. आउटपुट
B. इनपुट
C. थ्रूपुट
D. रिपोर्ट
E. इनमे से कोई नहीं

उत्तर :- B

29. सूचना के नियंत्रण के अंतर्गत ऑपरेट करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो डाटा को स्वीकार कर सकती है, डाटा को प्रोसेस कर सकती है, आउटपुट प्रोड्यूस् करती है और भविष्य में प्रयोग के लिए परिणामों को स्टोर करती है ……………….

A. इनपुट
B. कंप्यूटर
C. सॉफ्टवेयर
D. हार्डवेयर
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :-  B

30. कंप्यूटर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का फंक्शन क्या है ?

A. इनवॉइस बनाता है
B. गणनाऍं और प्रोसेसिंग करता है
C. डाटा डिलीट करता है
D. डाटा को करप्ट करता है
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- B

31. CPU और I/O के बीच सिगनलों के मूवमेंट को कौन नियंत्रित करता है ?

A. ALU
B. कण्ट्रोल यूनिट
C. मेमोरी यूनिट
D. सेकेंडरी स्टोरेज
E. इनमें से कोई नहीं

उत्तर :- B

32. प्रोसेसर के तीन मुख्य भाग हैं …………

A. ALU , कण्ट्रोल यूनिट और रजिस्टर
B. ALU , कंट्रोल यूनिट और RAM
C. कैश , कण्ट्रोल यूनिट और रजिस्टर
D. कण्ट्रोल यूनिट , रजिस्टर और RAM
E. RAM , ROM और CD-ROM 

उत्तर :- A

33. निम्न में से कौन सा इनपुट यूनिट से नहीं जुड़ता है। 

A. यह बहरी दुनिया से डाटा स्वीकार करता है
B. यह डाटा को बाईनरी कोड में बदलता है जिसे कंप्यूटर समझता है
C. यह बाइनरी डाटा को मानव द्वारा पढ़ें जाने वाले रूप में बदलता है जिसे प्रयोक्ता समझ सकते हैं
D. यह आगे प्रोसेसिंग के लिए डाटा को बाइनरी रूप में कंप्यूटर में भेजता है।
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- C

34. बुनियादी कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र में ………………….शामिल होते हैं

A. इनपुट , प्रोसेसिंग और आउटपुट
B. सिस्टम और एप्लीकेशन
C. डाटा , सुचना और एप्लीकेशन
D. हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर और स्टोरेज
C. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :-A

35. कंप्यूटर चलाने के लिए यूज किए जाने वाला डाटा या सूचना……………………… कहलाता है। 

A. सॉफ्टवेयर
B. हार्डवेयर
C. पेरिफेरल
D. CPU
E. इनमें से कोई नहीं 

उत्तर :- E

36. एक हार्डवेयर डिवाइस जो डाटा को अर्थ पूर्ण इनफॉरमेशन में परिवर्तित करता है। 

A. प्रोटेक्टर
B. आउटपुट डिवाइस
C. इनपुट डिवाइस
D. प्रोग्राम
E. प्रोसेसर 

उत्तर :- E

कंप्यूटर का विकास (Development of Computer)

कंप्यूटर एक ऐसी मानव द्वारा बनाया गया मशीन है जिसमें हमारे काम करने इत्यादि सभी के तरीकों में परिवर्तन कर दिया है इसने हमारे जीवन के हर पहलू को किसी न किसी तरह से छुआ है यह अविश्वसनीय अविष्कार ही कंप्यूटर है | पिछले लगभग चार दशकों में इसने हमारे समाज के रहन-सहन काम करने के तरीकों को बदल डाला है यह लकड़ी के अबेकस से शुरू होकर नवीनतम उच्च गति माइक्रोप्रोसेसर में परिवर्तित हो गया है |

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer)

  1. अबैकस (Abacus ) प्राचीन समय में (गणना करने के लिए ) अबैकस का उपयोग किया जाता था अबैकस एक यंत्र है जिसका उपयोग आंकिक गणना (Arithmetic calculation ) के लिए किया जाता है गणना तारों में पिरोये मोतियों के द्वारा किया जाता है इसका आविष्कार चीन में हुआ था |
  2. पास्कल कैलकुलेटर (Pascal Calculator ) या पास्कलाइन (Pascaline ) प्रथम गणना मशीन (Mechanical Calculator ) का निर्माण सन 1645 में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल ने किया था उस कैलकुलेटर में इंटरलॉकिंग गियर का उपयोग किया जाता था जो 0 से 9 संख्या को दर्शाता था यह केवल जोड़ या घटाव करने में लक्षम था अत : इसे ऐडिंग मशीन भी कहते हैं
  3. एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine):- सन 1801 में जोसफ मेरी जेकवार्ड ने स्वचालित बुनाई मशीन (Automated weaving loom ) का निर्माण किया | इसमें धातु के प्लेट को छेड़ कर पांच किया गया था और जो कपड़े की बुनाई को नियंत्रित करने में सक्षम था सन 1820 में एक अंग्रेज आविष्कारक चार्ल्स बबेज ने डिफेंस इंजन तथा बाद में एनालिटिकल इंजन बनाया चार्ल्स बबेज के कांसेप्ट का उपयोग कर पहला कंप्यूटर प्रोपोटाइप का निर्माण किया गया इस कारण चार्ल्स बबेज को कंप्यूटर का जन्मदाता कहा जाता है 10 साल के मेहनत के बावजूद हुए पूर्णता सफल नहीं हुए सन 1842 में लेडी लवलेश ने एक पेपर ( L. F. Menabrea on the Analytical Engine ) का इटालियन से अंग्रेजी में रूपांतरित किया अगस्टा ने ही एक पहला डेमोंसट्रेशन प्रोग्राम लिखा और इसके बाइनरी अर्थमैटिक के योगदान को जॉन वॉन न्यूमैने ने आधुनिक कंप्यूटर के विकास के लिए उपयोग किया गया इसलिए अगस्टा को प्रथम प्रोग्रामर तथा बाइनरी प्रणाली का आविष्कारक कहा जाता है
  4. हरमैन होलर्थ और पंच कार्ड सन 1880 के लगभग होलर्थ ने पंच कार्ड का निर्माण किया जो आज के कंप्यूटर कार्ड के तरह के तरह होता था इन्होंने होलर्थ 80 कलम कोड और सेंसर टेबुलेटिंग मशीन का भी आविष्कार किया था
  5. प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर सन 1942 में हावर्ड यूनिवर्सिटी के एच आइकन ने एक कंप्यूटर का निर्माण किया यह कंप्यूटर Mark I आज के कंप्यूटर का प्रोपोटाइप था सन 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ENIAC (Electronic Numerical Integrated and Calculator ) का निर्माण हुआ जो प्रथम पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था तथा जो एक निर्माण Pennsylvania University के J.Presper Eckert और John Muchly ने किया था |
  6. स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट (EDSAC -Stored Program Concept – EDSAC ) :- स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट के अनुसार प्रचालन निर्देश (Operating Instructions ) और आंकड़ा (Data) जिनका प्रोसेसिंग में उपयोग हो रहा है उसे कंप्यूटर में स्टोर होना चाहिए और आवश्यकता अनुसार प्रोग्राम के क्रियान्वयन (Execution) के समय रूपांतरित होना चाहिए ऐडजैक (Sequence ) को स्टार्ट करने में सक्षम था और पहला कंप्यूटर प्रोग्राम के समतुल्य था |
  7. युनिभैक -1 (UNIVAC-I ) : Universal Automatic Computer कंप्यूटर भी कहते हैं सन 1951 में व्यापारिक उपयोग के लिए उपलब्ध यह प्रथम कंप्यूटर था इसमें कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी फर्स्ट जनरेशन के गुण करैक्ट्रिटीज समाहित थे | 

कंप्यूटर का पीढ़ी ( Generation of Computer )

कंप्यूटर के विभिन्न पीढ़ियों को विकसित करने का उद्देश्य सस्ता ,छोटा, तेज तथा विश्वासिक कंप्यूटर बनाना है |

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर ( first generation computers ) 1942 - 1955

यूनीभैक I प्रथम व्यवसायीक कंप्यूटर था इस मशीन का विकास फौज और वैज्ञानिक प्रयोग के लिए किया गया था इसमें निर्वात ट्यूब के उपयोग में किया गया था ये आकार में बड़े और अधिक उष्मा उत्पन्न करने वाले थे इसमें सारे निर्देश तथा सूचनाएं 0 से 1 के रूप में कंप्यूटर में संग्रहित होते थे | तथा मशीनी भाषा का प्रयोग किया गया था संग्रहण के लिए पंच कार्ड का भी उपयोग किया गया था उदाहरण – एनियक (ENIAC ) युनिभैक (UNIVAC) तथा मार्क -1 इसके उदहारण हैं निर्वात ट्यूब के कुछ कमियाँ भी थी | निर्वात ट्यूब गर्म होने में समय लगता था तथा गर्म होने के बाद अत्यधिक ऊष्मा पैदा होती थी जिसे ठंडा रखने के लिए खर्चीली वातानुकूलित यंत्र (Air – Conditioning System ) का उपयोग करना पड़ता था तथा अधिक मात्रा में विधुत खर्च होती थी |

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (second generation computers) 1955 - 1964

इस पीढ़ी के कंप्यूटर में निर्वात ट्यूब की जगह हल्के छोटे ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया कंप्यूटर में आंकड़ों (डेटा) को निरूपित करने के लिए मैग्नेटिक डिस्क तथा टेप का उपयोग किया गया मैग्नेटिक डिस्क पर आयरन ऑक्साइड की परत होती थी उनकी गति और संग्रहण क्षमता भी तीव्र थी इस दौरान व्यवसाय तथा उद्योग जगत में कंप्यूटर का प्रयोग प्रारंभ हुआ तथा नया प्रोसेसिंग भाषा का विकास किया गया |

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (third generation computers) 1965-1974

इलेक्ट्रॉनिक्स में निरंतर तकनीकी विकास से कंप्यूटर के आकार में कमी तथा तीव्र गति से कार्य करने की क्षमता का विकास हुआ तीसरी पीढ़ी का कंप्यूटर ट्रांजिस्टर के जगह इंटीग्रेटेड सर्किट(Integrated Circuit -IC ) का प्रयोग शुरू हुआ जिसका वीकास जे. एस.किल्वी ने किया आरम्भ में (SLI – Large Scale Integration) का प्रयोग किया गया इसमें एक सिलिकॉन चिप पर बड़ी मात्रा में (IC – Integrated Circuit) या ट्रांस्जिस्टर का प्रयोग किया गया (RAM – Random Access Memory ) के प्रयोग होने से मेगनेटिक टेप तथा डिस्क के संग्रहण क्षमता में वृद्धि हुई लोगों द्वारा प्रयुक्त कंप्यूटर में टाइम शेयरिंग का विकाश हुआ जिसके द्वारा एक से अधिक यूजर एकसाथ कंप्यूटर के संसाधन का उपयोग कर सकते हैं। हार्डवेयर ओर सॉफ्टवेयर अलग -अलग मिलना प्रारंभ हुआ ताकि यूजर अपने आवश्यकतानुसार सॉफ्टवेयर ले सके

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर ( Fourth Generation Computer ) 1975 up till now

चौथि पीढ़ी के कंप्यूटर में LAI IC के जगह VLSI ( Vary Large Scale Integration ) तथा ULSI (Ultra Large Scale Integration ) का प्रयोग प्रारंभ हुआ जिसमें एक चिप में लगभग लाखों चीजों को संग्रहित किया जाता था VLSI तकनीक के उपयोग से माइक्रोप्रोसेस का निर्माण हुआ जिससे कंप्यूटर के आकार में कमी और क्षमता में वृद्धि हुई माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग न केवल कंप्यूटर में बल्कि और भी बहुत सारे उत्पादो में किया गया जैसे वाहनों ,सिलाई मशीन ,मिक्रोवेवे ओवन ,इलेक्ट्रॉनिक गेम इत्यादि में मैगनेटिक डिस्क तथा टेप के स्थान पर सेमीकंडक्टर मेमोरी का उपयोग होने लगा RAM की क्षमता में वृद्धि से समय की बचत हुई और कार्य अत्यंत तीव्र गति से होने लगा इस दौरान GUI (Graphical User Interface के विकाश से कंप्यूटर का उपयोग करना और सरल हो गया। MS – DOS,MS – Windows तथा Apple Mac OS ऑपरेटिंग सिस्टम तथा ‘C’ भाषा का विकास हुआ उच्च स्तरीय भाषा का मानकीकरण किया गया ताकि प्रोग्राम सभी कम्प्यूटरों में चलाया जा सके।

पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर (The Fifth Generation Computer-At present)

पाँचवी पीढ़ी के कंप्यूटर में VLSI के स्थान पर ULSI-(Ultra Large Scale Ingegration ) का विकास हुआ और एक चिप द्वारा करोड़ों गणना करना संभव हो सका संग्रहण के लिए सीडी (Compact Disk ) का विकास हुआ इंटरनेट ईमेल तथा वर्ल्ड वाइज वेव (WWW) का विकास हुआ बहुत छोटे तथा तीव्र गति से कार्य करने वाले कंप्यूटर का विकास हुआ प्रोग्रामिंग की जटिलता कम हो गई। कृत्रिम ज्ञान क्षमता(Artificial Intellegence ) को विकसित करने की कोशिश की गई ताकि परिस्थिति अनुसार कंप्यूटर निर्णय ले सके। पोर्टेबल पीसी और डेस्कटॉप पीसी ने कंप्यूटर के क्षेत्र में क्रांति ला दिया तथा इसका उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में होने लगा

स्पेशल परपज और जनरल पर्पस कंप्यूटर (Special Purpose & General Purpose Computers)

  1. स्पेशल पर्पस कंप्यूटर :- स्पेशल पर्पस कंप्यूटर का उपयोग किसी एक निश्चित और विशेष तरह के कठिनाई को दूर करने के लिए किया जाता है किसी विशेष प्रयोग   के लिए ऐसे सिस्टम अत्यधिक प्रभावित होते हैं उदाहरण – स्वचालित ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम, स्वचालित एयर क्राफ्ट लैंडिंग सिस्टम इत्यादि
  2. जनरल पर्पस कंप्यूटर :- यह किसी विशेष कार्य के लिए निर्मित नहीं होते हैं यह एक से अधिक कठिनाइयों को दूर करने में सक्षम होते हैं तथा इनमें थोड़ा बहुत प्रोग्राम या निर्देश में परिवर्तन कर भिन्न-भिन्न कार्य संपादित किए जाते हैं उनका उपयोग साधारणतः अकाउंटिंग से लेकर जटिल अनुरूप (Simulation) तथा पूर्वानुमान (Forcasting ) में होता है। 

कार्य पद्धति के आधार पर वर्गीकरण (Classification on working System)

  1. डिजिटल कंप्यूटर(Digital Computer) :- डिजिटल कंप्यूटर में आकड़ें (Data) को इलेक्ट्रॉनिक पल्स के रूप में निरूपित किया जाता है जिसकी गणना 0 या 1 से निरूपित की जाती है इसका एक अच्छा उदाहरण है डिजिटल घड़ी इनकी गति तीव्र होती है तथा यह करोड़ गणनाएं प्रति सेकंड कर सकता है आधुनिक डिजिटल कंप्यूटर में द्विआधारी पद्धति (Binary System) का प्रयोग किया जाता है
  2. एनालॉग कंप्यूटर(Analog Computer ):- इसमें विद्युत के एनालॉग रूप का प्रयोग किया जाता है इसकी गति धीमी होती वोल्ट्मीटर और बैरोमीटर इत्यादि एनालॉग यंत्र के उदाहरण हैं।
  3. हाइब्रिड कंप्यूटर (Hybrid Computer) :- यह डिजिटल तथा एनालॉग का मिश्रित रूप है इसमें इनपुट तथा आउटपुट एनालॉग रूप में होता है परंतु प्रोसेसिंग डिजिटल रूप में होता है इनमें एनालॉग से डिजिटल कन्वर्टर (ADC ) तथा डिजिटल से एनालॉग कन्वर्टर(DAC) का उपयोग होता है।

आकर के आधार पर वर्गीकरण (Classification on size)

  1. मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mainframe Computer) :- इन मशीनों की विशेषता वृहत आंतरिक स्मृति संग्रहण क्षमता(Large internal memory storage) तथा सॉफ्टवेयर और पेरीफेरल यंत्रो को वृहत रूप से जोड़ा जाना है इसके कार्य करने की क्षमता तथा गति अत्यंत तीव्र होती है इन सिस्टम पर एक साथ एक से अधिक लोग (Multi User ) विभिन्न कार्य कर सकते हैं इसके लिए मल्टी ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण (Bell) प्रयोगशाला में किया। उपयोग बैंकिंग ,अनुसंधान ,रक्षा ,अंतरिक्ष आदि के क्षेत्र में उदाहरण – IBM – 370,IBM – S /390 तथा युनिभैक – 1110 इत्यादि।
  2. मिनी कंप्यूटर (Mini Computer) :- ये आकार में मेनफ्रेम से काफी छोटे होते हैं इसकी संग्रहण क्षमता और गति अधिक होती है इस पर एक साथ कई लोग (Multi User ) काम कर सकते हैं 80386 सुपर चिप का प्रयोग इसमें करने पर वह सुपर मिनी कंप्यूटर में बदल जाता है उपयोग – कंपनी, यात्री आरक्षण, अनुसंधान आदि में।
    उदाहरण – AS 400, BULL HN – DPX2 ,HP 9000 और RISC 6000.
  3. माइक्रो कंप्यूटर (Micro Computer ):- माइक्रो कंप्यूटर में प्रोसेसर के रूप में माइक्रो प्रोसेसर का उपयोग होता है इसमें इनपुट के लिए की बोर्ड तथा आउटपुट देखने के लिए मॉनिटर का उपयोग होता है इसकी क्षमता एक लाख सक्रियाएँ प्रति सेकंड होती है उपयोग – व्यावसायिक तौर पर, घरों में, मनोरंजन, चिकित्सा, आदि के क्षेत्र में  – उदाहरण – APPLE MAC ,IMAC ,IBM ,PS/2 कम्पेटेवल।
  4. पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer ) :- यह आकार में बहुत छोटे होते हैं यह माइक्रो कंप्यूटर का ही एक रूप है इसका ऑपरेटिंग सिस्टम एक साथ कई कार्य (Multitasking ) कर सकता है। इसे इंटरनेट से भी जोड़ा सकते हैं भारत में निर्मित प्रथम कंप्यूटर का नाम सिद्धार्थ है पैक मैन नामक प्रसिद्ध कंप्यूटर खेल के लिए निर्मित हुआ था।
    उपयोग – घरों में, व्यावसायिक रूप से, मनोरंजन ,आंकड़ों के संग्रहण में इत्यादि।
  5. लैपटॉप (Laptop) :- PC की तरह ही कार्य करता है ,परंतु आकार PC से भी छोटा तथा कहीं भी ले जाने योग्य होता है CPU , मॉनिटर ,की-बोर्ड ,माउस तथा अन्य ड्राइव भी इसमें संयुक्त होते हैं यह बैटरी से भी कार्य करता है अतः कहीं भी इसको ले जाकर इसका उपयोग किया जा सकता है वाई फाई और ब्लू-टूथ की सहायता से इंटरनेट का भी उपयोग किया जा सकता है
    उदाहरण – IBM ,COMPAQ,APPLE ,LENOVO, आदि कंपनियों के लैपटॉप।
  6. पामटॉक (Palmtop) :- यह आकार में बहुत ही छोटा कंप्यूटर है जिसे हथेली पर रखकर उपयोग किया जाता है इसमें इनपुट ध्वनि के रूप में भी किया जाता है इसे PDA  भी कहा जाता है
  7. सुपर कंप्यूटर(Super Computer) :-सुपर कंप्यूटर एक कंप्यूटर है जिसकी संग्रहण क्षमता तथा गति अत्यधिक तीव्र है यह अपनी पीढ़ी के दूसरी कंप्यूटरों की तुलना में अत्यधिक है विश्व का प्रथम सुपरकंप्यूटर 1976 ईस्वी में क्रे -1 (Cray – 1 ) था जो क्रे रिसर्च कंपनी द्वारा परम सी-डैक द्वारा 1991 में विकसित किया गया था वर्तमान प्रोसेसिंग क्षमता विशेषत: गणना की गति में सुपर कंप्यूटर सबसे आगे है इसमें मल्टि प्रोसेसिंग (Multi Processing ) तथा समानान्तर प्रोसेसिंग (Parallel Processing ) प्रयुक्त होता है जिसके द्वारा किसी भी कार्य को टुकड़ों में विभाजित किया जा सकता है तथा कई व्यक्ति एक साथ कार्य कर सकते हैं इसका उपयोग एनीमेटेड ग्राफिक ,परमाणु अनुसंधान ,इत्यादि में होता है
    पेक सीरीज के सुपर कंप्यूटर DRDO – Defence Research and Development Organisation ) हैदराबाद तथा अनुपम सीरीज के कंप्यूटर BARC – Bhabha Atomic Research Centre ) के द्वारा विकसित किया गया। उदाहरण – Cray – 1

इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस (Input and output devices )

इनपुट डिवाइस (Input device)

एक कंप्यूटर में इनपुट तथा आउटपुट दोनों उपकरण होते हैं जिन यंत्रो के द्वारा डेटा इनपुट किया जाता है अर्थात जिन यंत्रो से आंकड़े ,शब्द या निर्देश मेमोरी में डाले जाते हैं इनपुट डिवाइसेज कहलाते हैं दूसरे शब्दों में ये ऐसे यंत्र हैं जिनके द्वारा हम कंप्यूटर को निर्देश देते हैं और कंप्यूटर उन पर प्रोग्राम के अनुरूप कार्य करता है जैसे कि की-बोर्ड, माउस आदि।
कुछ प्रमुख इनपुट डिवाइसेज निम्नलिखित है
     1. की – बोर्ड (Keyboard )
     2. माउल (Mouse)
     3. ट्रैकबॉल (Trackball )
     4. जॉयस्टिक (Joystick )
     5. स्कैनर (Scanner )
     6. माइक्रोफोन (Microphone )
     7. वेब कैम (Web Cam )
     8. बार कोड रीडर (Bar Code Reader )
     9. ओ सी आर (OCR – Optical Character Reader)
     10. ओ एम् आर (OMR -Optical Mark Reader )
  11. एम आई सी आर (MICR – Magnetic Ink Character Reader )
     12. किम्बॉल टैग रीडर (Kimball Tag Reader )
     13. स्पीच रिकग्निशन सिस्टम (Speech Recognition System )
     14. लाइट पेन (Light pen )
     15. टच स्क्रीन (Touch Screen )

     1. की-बोर्ड (Keyboard) :- की – बोर्ड किसी भी कंप्यूटर की प्रमुख इनपुट डिवाइस है जिनके प्रयोग से कंप्यूटर में टैक्सट तथा न्यूमेरिकल डेटा निवेश कर सकते हैं की-बोर्ड में सारे अक्षर टाइपराइटर की तरह क्रम में होते हैं लेकिन इसमें टाइपराइटर से ज्यादा बटन होते हैं इसमें कुछ फंक्शन बटन होते हैं जिनको बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए पूर्व निर्धारित किया जा सकता है जैसे F1 बटन को सहायता (Help) के लिए प्रोग्राम किया जाता है की-बोर्ड को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए एक विशेष जगह (port) बनी होती है, लेकिन आजकल USB की- रिपोर्ट आते हैं। जो कंप्यूटर के USB पोर्ट में लग जाते हैं तथा वायरलेस की-बोर्ड भी आते हैं जिन्हें सिस्टम से जोड़ने की जरूरी नहीं होती है। की-बोर्ड में पांच प्रकार के की (Key) होती हैं 

     a. अल्फाबेट की (Alphabet Keys) :-  की – बोर्ड में 26 अल्फाबेट की A से Z तक होते हैं जिनका उपयोग कर हम किसी भी शब्द या टेक्स्ट को लिख सकते हैं। 

     b. संख्यात्मक की (Numeric Keys):- इन की (Keys ) का उपयोग नंबर या अंक टाइप करने के लिए होता है इन पर 0 से 9 तक संख्या अंकित रहते हैं साधारणत: की-बोर्ड के दाहिने तरफ अंक टाइप करने के लिए संख्यात्मक कीपैड होता है इसमें 0 से 9 तक अंक, दशमलव, जोड़, घटाव गुणा तथा के की (Key) होते हैं। 

     c. फंक्शन की (Function Keys ) :- ये की-बोर्ड में सबसे ऊपर स्थित होते हैं इन बटनों पर F1 से F12 अंकित होते हैं इनका उपयोग(Use) बार-बार किए जाने वाले कार्य के लिए पहले से निश्चित रहता है इनके उपयोग से समय की बचत होती है

     d. कर्सर कंट्रोल की (Cursor Control Keys) :- इन की (Keys) का उपयोग स्क्रीन पर कर्सर को कहीं भी ले जाने के लिए होते हैं ये चार भिन्न दिशाओं को इंगित करते हैं जिसे चार तीर के निशान से दर्शाया रहता है इसे एरो कीस (Arrow Keys) भी कहा जाता है इसे दायाँ (Right) ,बायाँ(Left), ऊपर (Up), तथा नीचे (Down) ऐरो-की कहते हैं 

इनके ठीक ऊपर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए चार और बटन होते हैं जिन्हें Home ,End ,Page Up ओर Page Down कहते हैं।

हम की (Home Key) :– परसर को लाइन के आरंभ में लेकर जाता है 

एन्ड की (End Keys) :– कर्सर को लाइन के अंत में लेकर जाता है

पेजअप ( Page Up) :- कर्सर को एक पेज पीछे या पिछले पेज में ले जाता है

पेज डाउन (Page Down):– कर्सर को अगले पेज पर ले जाता है 

     e. स्पेशल परपज की (Special Purpose Key) 

कैप्स लॉक (Caps Lock Keys) :- यह एक टॉगल बटन है टॉगल बटन अथार्त एक बार दबाने पर वह सक्रिय तथा दूसरी बार पुन: उसे दबाने पर निष्क्रिय हो जाता है इसे सक्रिय रखने (On) पर सारे अक्षर बड़े अक्षरों (Capital letter) में लिखा जाता है जिसे कंप्यूटर में अप्परकेस Upper) कहते हैं इसे पुन: दबाकर निष्क्रिय किया जाता है जिससे छोटे अक्षरों (Small letter या Lower case में लिखना आरंभ हो जाता है

नम लॉक की (Num Lock Key) :- यह भी टॉगल बटन है इसके सक्रिय रहने से की-बोर्ड के ऊपर की संख्यात्मक की-पैड सक्रिय (On) रहता है, नहीं तो नंबर पैड डिरेक्शनल एरो के रूप में कार्य करता है 

शिफ्ट की (Shift Keys) :- यह एक संयोजन बटन (Combination Keys) है इसे किसी और बटन के साथ प्रयोग करते हैं कि की-बोर्ड पर जिस किसी भी बटन पर दो कैरेक्टर अंकित रहता है तो ऊपर वाले कैरेक्टर दो टाइप करने के लिए शिफ्ट की का उपयोग करते हैं जैसे कि की-बोर्ड पर दो के ऊपरी भाग में @ (Character) करैक्टर है। अत: @ को टाइप करने के लिए शिफ्ट के साथ @ बटन दबाते हैं तो @ टाइप होता है नहीं तो दो टाइप होगा अगर कैप्स लॉक सक्रिय है तो भी शिफ्ट के साथ कोई भी अक्षर टाइप करने पर छोटे अक्षर (Small letter या lowercase) में टाइप होगा नंबर पैड को डिरेक्शनल एरो के रूप कार्य कराने के लिए भी हम इसका उपयोग करते हैं की-बोर्ड में शिफ्ट की दो स्थानों पर होता है

इंटर की (Enter Key) या रिटर्न की (Return Keys) :- कंप्यूटर को दिए गए कमाड नाम या प्रोग्राम नाम को निष्पादित करने या शुक्ल करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है डॉक्यूमेंट में एक पंक्ति का अंत तथा नये पंक्ति का आरंभ करता है यह भी की-बोर्ड पर दो स्थानों पर होता है 

टैब की (Tab Keys) :- या टैबुलेट(Tabulator) बटन का संक्षिप्त नाम है यह कर्सर को निश्चित दूरी तक एक बार में ले जाता है और ब्राउज़र में पेज में दूसरे लिंक पर ले जाता है वर्ड (Word) या (Excel) एक्सेल के टेबल के एक वर्ग से दूसरे वर्ग में जाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है इसके द्वारा डॉक्यूमेंट बॉक्स में दिए गए विकल्पों में से किसी एक का चयन भी किया जा सकता है वर्ड डॉक्यूमेंट (Word Document) में Tab सेट कर पेज का मार्जिन, पैराग्राफ तथा एक शब्द से दूसरे शब्द के बीच की दूरी को सेट किया जाता है।

एस्केप की (Esc-Escape Key) :– यह कैंसिल (Cancel) बटन के समतुल्य है पावरप्वाइंट (Power Point) में इसके उपयोग से स्लाइड शो रुक जाता है तथा वेव पेज पर चलता हुआ एनीमेशन रुक जाता है वेव पेज जो लोड हो रहा होता है इसके प्रयोग से रुक जाता है तथा कंट्रोल (Ctrl) के साथ उपयोग करने पर स्टार्ट (Start) मेनू खुल जाता है अर्थात जो भी कार्य जो कंप्यूटर में चल रहा है या प्रोग्राम खुला है उसे बंद कर देता है या उससे बाहर आ जाता है 

स्पेस बार (Spacebar) :– शब्दों के बीच में जगह डालने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। 

डिलीट की (Delete Keys) :- कर्सर के ठीक दाएं और के अक्षर, चिह्न या जगह को मिटाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है इसके द्वारा चयन किया हुआ (Selected) शब्द ,लाइन, पेज, फाइल या ड्राइव या ड्रॉविंग को मिटाया जाता है 

कंट्रोल की (Ctrl – Control Key):- संयोजन बटन (Combination Keys) है जो किसी और बटन के साथ मिलकर विशेष कार्य करता है इसका कार्य विभिन्न सॉफ्टवेयर के अनुसार बदलता रहता है जैसे कि (Ctrl+C) कॉपी करने तथा (Ctrl+V) पेस्ट करता है की – बोर्ड पर दो कंट्रोल की होते हैं कंट्रोल + ऑल + डेल तीनों बट्नों को एक साथ दबाने पर विंडो टास्क मैनेजर का विंडो खुलता है तथा इसमें हम किसी भी प्रोग्राम को बंद कर सकते हैं अगर कोई प्रोग्राम कंप्यूटर में चलते – चलते हैंग कर जाता है तो इन तीनों के उपयोग से उस प्रोग्राम को बंद किया जा सकता है इसे रिसेट भी कहते हैं।

प्रिंट स्क्रीनकी (Print Screen Key) :- इस key को Shift Key के साथ प्रयोग कर Screen पर प्रदर्शित फाइल या फोटो प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया जाता है।

स्क्रॉल लॉक की (Scroll Lock Key ) :- यह बटन की-बोर्ड के ऊपर पॉज की (Pause Key ) के पास स्थित होता है यह टेक्स्ट (Text) या रन (Run) कर रहे प्रोग्राम को अस्थाई रूप से एक स्थान पर रोकता है फिर Text या प्रोग्राम को सक्रिय करने के लिए इसी बटन को दोबारा उपयोग करना होता है।

पॉज की (Pause Key) :- यह की की-बोर्ड के ऊपर दाहिने तरफ स्थित होता है यह बटन को अस्थाई तौर पर चल रहे प्रोग्राम को रोक देता है तथा किसी बटन को दबाने पर फिर से प्रोग्राम चलने लगता है जैसे – कंप्यूटर गेम में अस्थाई रूप से गेम को रोकने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

मोडीफायर की (Modifier Key):- यह कंप्यूटर की-बोर्ड पर विशेष (Key) है जो किसी (Key ) के कॉन्बिनेशन में उपयोग किया जाता है यह दूसरे की (Key) के कार्य को रूपांतरित कर देता है जैसे Alt + f4 MS – विंडोज में सक्रिय प्रोग्राम विंडो को बंद कर देता है जहां अल्ट मोडीफायर की (Key) है जो f4 के कार्य को रूपांतरित कर देता है कुछ मोडीफायर की (Key) निम्नलिखित है –

     1. शिफ्ट की  2. कंट्रोल की 3. ऑल्ट की

माउस (Mouse) :- माउस एक इनपुट डिवाइस है। डगलस सी इन्जेलवर्ट ने 1977 में इसका आविष्कार किया था इसमें लेफ्ट बटन राइट बटन और बीच में एक स्क्रोल व्हील होता है माउस के उपयोग करने से हमे की-बोर्ड के किसी बटन को याद रखने की आवश्यकता नहीं होती है बस माउस के पॉइंटर (Pointer) को स्क्रीन पर किसी नियत स्थान पर क्लिक करना होता है इसे पॉइंटिंग डिवाइस भी कहते हैं माउस दो बटन, तीन बटन, तथा ऑप्टिकल भी होते हैं माउस के नीचे एक रबर बॉल होता है जो माउस को सतह पर हिलाने में मदद करता है बॉल के घूमने से स्क्रीन पर माउस पॉइंटर के दिशा में परिवर्तन होता है माउस के नीचे रखे प्लेट के आकार की वस्तु को माउस पैड करते हैं।

माउस के मुख्यत: चार कार्य हैं –

क्लिक या लेफ्ट क्लिक (Click or Left Click ):- लेफ्ट माउस बटन को एक बार दबाकर छोड़ने पर यह एक आवाज (Click Sound ) देता है तथा स्क्रीन पर किसी एक (Object ) या चयन (Select ) करता है। जैसे माई कंप्यूटर(My Computer Icon) पर लेफ्ट बटन क्लिक करने से इसका रंग नीला हो जाता है मतलब इसका चयन (Selected) हो गया है इस बटन का उपयोग सामान्यता (Ok ) के लिए किया जाता है।

डबल क्लिक (Double Click) :- लेफ्ट माउस बटन को जल्दी-जल्दी दो बार दबाकर छोड़ने को डबल क्लिक कहते हैं इसका उपयोग किसी फाइल डॉक्यूमेंट या प्रोग्राम को खोलने(Open) के लिए होता है।

राइट क्लिक(Right Click) :- राइट माउस बटन को एक बार दबाकर छोड़ने पर यह स्क्रीन पर आदेशों (Commands) की एक सूची (List) देता है यह ऑब्जेक्ट की प्रॉपर्टीज को एक्सेस करने में उपयुक्त होता है।

ड्रैग और ड्रॉप (Drag and Drop ):– इसका उपयोग किसी चीज (Item) को स्क्रीन पर एक जगह से दूसरे जगह ले जाने के लिए होता है। स्क्रीन के किसी एक (Item) के ऊपर पॉइंटर को ले जाकर लेफ्ट माउस बटन को दबाए हुए स्क्रीन पर किसी दूसरे जगह ले जाकर छोड़ते हैं जिसके फलस्वरुप वह item दूसरी जगह स्थानांतरित हो जाता है इस क्रिया को ड्रग और ड्रॉप कहते हैं।

ट्रैकबॉल (Trackball) :- यह माउस का ही एक विकल्प है। इसके ऊपर एक बॉल होता है जिसे हाथ से घूमाकर पॉइंटर की दिशा में परिवर्तन किया जाता है मुख्यत: इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में कैड(CAD) तथा कैम (CAM) में किया जाता है।

जॉयस्टिक (Joystick) :- यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका उपयोग वीडियो तथा कंप्यूटर गेम खेलने में होता है इसकी भी कार्य प्रणाली ट्रैकबॉल की तरह होती है केवल बोल की जगह इसमें एक छड़ी (Stick) लगी होती है।

स्कैनर(Scanner) :- इसका उपयोग टेक्स्ट (Text) या चित्र (Image) को डिजिटल रूप में परिवर्तित करने में होता है जिसे हम लोग स्क्रीन पर देख सकते हैं इन स्क्रीन चित्रों का उपयोग भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है इन स्कैन चित्रों को मेमोरी या सिडी में सुरक्षित रखा या कोई प्रोसेस या एडिटिंग किया जा सकता है यह भी एक इनपुट डिवाइस है यह एक फोटो कॉपीयर मशीन की तरह दिखता है काउंटर पर बैठे सेल्स क्लर्क किसी वस्तु का टैग स्कैन पर सोर्स डाटा ऑटोमेशन का प्रयोग करता है।

माइक्रोफोन (Microphone) :- इन इनपुट डिवाइस का प्रयोग किसी भी आवाज को रिकॉर्ड करने में होता है

वेब कैम (Webcam) :- इसका प्रयोग इंटरनेट पर फोटो देखने तथा फोटो लेने के लिए होता है इसका उपयोग कर इंटरनेट की सहायता से दूर बैठे आदमी का फोटो देख सकते हैं परंतु दूसरे व्यक्ति के पास भी वेब कैम उपलब्ध होना चाहिए यह डिजिटल कैमरे की तरह होता है जिसे कंप्यूटर में जोड़कर इनपुट डिवाइस के रूप में प्रयोग होता है

बारकोड रीडर (Bar Code Reader) :- यह (Point of Sales )डेटा रिकॉर्डिंग है आजकल सुपरमार्केट में मूल्य तथा डेटा अपडेट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है सुपरमार्केट में सामान के ऊपर जो सफेद और काली लाइन बनी होती है वह बारकोड है जिसे बारकोड रीडर जो एक स्कैनिंग डिवाइस है कि द्वारा स्कैन कर डिजिटल रूप में कंप्यूटर में भेजा जाता है आजकल बारकोड रीडर का उपयोग सुपरमार्केट, पुस्तकालय ,बैंक तथा पोस्ट ऑफिस में भी किया जाता है।

ओ सीआर (OCR-Optical Characters Recognization ):– यह टाइप या हाथ से लिखे हुए डेटा को भी पढ़ सकता है यह स्कैनर तथा विशेष सॉफ्टवेयर का संयोजन है जो प्रिंटर डेटा या हस्तलिखित डाटा ASCII में रूपांतरित कर देता है इसका उपयोग कागजी रिकॉर्ड को इलेक्ट्रिक फीलिंग तथा स्कैन चालान को स्प्रेडशीट में परिवर्तित करने में किया जाता है।

किम्बॉल टैग रीडर (Kimball Tag Reader) :- Kimball Tag Reader एक छोटा सा कार्ड है जिसमें छेद पांच रहते हैं जैसे किसी दुकान में कपड़े में कार्ड लगा रहता है जिसे खरीदने के बाद निकाल दिया जाता है और कंप्यूटर केंद्र में प्रोसेसिंग के लिए भेज दिया जाता है।

एम आई सी आर (Micr-Magnetic Ink Character Reader ) :- खास चुम्बकीय स्याही से खिले अक्षरों या डॉक्यूमेंट को इसके द्वारा पढ़ा जाता है या कंप्यूटर में संग्रह  किया जाता है बैंकों में इस तकनीक का व्यापक उपयोग होता है चुंबकीय स्याही और विशेष फॉन्ट का संयोजन से प्रति घंटे हजार चेक स्कैन किया जा सकता है इससे समय की बचत तथा तीव्र गति से कार्य संपादित किया जा सकता है 

ओ एम आर (OMR-Optical Mark Reader) :- यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग फॉर्म या कार्ड पर विशिष्ट स्थानों पर डाले गए चिन्हों को पढ़ने में होता है इसमें उच्च तीव्रता वाले प्रकाशीय करनों को डालकर चिन्हों को पढ़ा जाता है इसका उपयोग लॉटरी टिकट ऑफिशियल फॉर्म तथा वस्तुनिष्ठ उत्तर पुस्तिकाओं जांचनें में होता है।

स्पीच रिकग्निशन सिस्टम (Speech Recognition System) :- स्पीच रिकग्निशन माइक्रोफोन या टेलीफोन द्वारा बोले गए शब्दों के सेट को पकड़कर ध्वनि में परिवर्तित करने की क्रिया है Recognized शब्दों को कमांड और नियंत्रण डेटा प्रविष्टि और दस्तावेज तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है स्पीच रिकग्निशन सिस्टम को बोले हुए शब्दों को मशीन के पढ़ने लायक इनपुट में बदल देता है इसका उपयोग voice डायलॉग, सरल डेटा प्रविष्टि स्पीड से टेक्स्ट प्रोसेसिंग तथा हवाई जहाज कॉकपिट में होता है जो व्यक्ति कंप्यूटर इनपुट के लिए अपने हाथों का प्रयोग नहीं कर पाते वे स्पीच रिकग्निशन सिस्टम की सहायता से कंप्यूटर पर कार्य कर सकते हैं।

प्रकाशीय कलम (Light Pen) :- यह एक इनपुट डिवाइस है इसका उपयोग (Direct) स्क्रीन पर कुछ भी लिखने ,चित्र बनाने में होता है।

टच स्क्रीन (Touch Screen) :- यह एक इनपुट डिवाइस है। जब हम स्क्रीन को स्पर्श करते हैं तो यह पता लगा लेता है कि हमने इसे कहां स्पर्श किया है। इसका उपयोग बैंकों में एटीएम तथा सार्वजनिक सूचना केंद्रों में स्क्रीन पर उपलब्ध विकल्पों का चयन करने के लिए किया जाता है इसका उपयोग संगीत सुनने के लिए होता है।

आउटपुट डिवाइस (Output Devices)

यह ऐसे उपकरण है जो प्रोसेस के उपरांत रिजल्ट देते या प्रदर्शित करते हैं इसके द्वारा कंप्यूटर द्वारा प्रोसेड जानकारी को देखते या ग्रहण करते हैं।

कुछ आउटपुट डिवाइस निम्नलिखित है। -

1.(मॉनिटर) Monitor

2. (प्रिंटर) Printer

3. (स्पीकर) Speaker

4. (प्लॉटर) Plotter

5.(स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर) Screen Image Projector

1. (मॉनिटर) Monitor :- यह एक आउटपुट डिवाइस है जो चित्र या प्रोसेस इनपुट के रिजल्ट को स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है यह कंप्यूटर तथा यूजर के बीच संबंध स्थापित करता है मॉनिटर की गुणवत्ता की पहचान डॉट पिच,रिजाल्यूशन और रिफ्रेश रेट से किया जाता है कंप्यूटर की समस्त सूचनाएं देखने के लिए इस डिवाइस का प्रयोग किया जाता है इसे VDU (Visual Display Unit ) भी कहते हैं इसके डिस्प्ले आकार को डायगोनली मापा जाता है। मॉनिटर का रिजाल्यूशन जितना अधिक हो पिक्सल उतना ही अधिक होंगें। 

मुख्यतः दो प्रकार के मॉनिटर आजकल प्रचलन में है ।

a. सी आर टी मॉनिटर (CRT-Cathod Ray Tube) :- यह मॉनिटर उसी सिद्धांत पर कार्य करता है जिन पर टीवी करता है इसमें एक कैथोड रे ट्यूब रहता है इसमें इलेक्ट्रॉन गण लगा होता है इसके द्वारा प्राप्त इलेक्ट्रान बीम को परिवर्तित कर चित्र बनाया जाता है अर्थात स्क्रीन पर डिस्प्ले प्राप्त होता है सीआर टी स्क्रीन थोड़ी होती है मॉनिटर पर चित्र छोटे-छोटे बिंदुओं से मिलकर बनता है जिन्हें पिक्सेल कहते हैं।

b. टी एफ टी मॉनिटर (TFT- Thin Film Transistor) :- यह एक सीधी (Flat) स्क्रीन होता है जो हल्का तथा पतला होता है तथा कम जगह घेरता है। या सी.आर.टी मॉनिटर से अपेक्षाकृत महंगा होता है। 

     2. प्रिंटर (Printer) :- प्रिंटर एक मुख्य आउटपुट डिवाइस है जिसके द्वारा सॉफ्ट कॉपी का प्रिंटेड कॉपी या हार्ड कॉपी कागज पर प्राप्त होता है इसका उपयोग स्थाई दस्तावेज (Permanent Document) तैयार करने के लिए होता है 

प्रिंटर के प्रकार –

कंप्यूटर प्रिंटर को मुख्यतः तीन समूहों में बांटा जाता है। –

a. कैरेक्टर प्रिंटर (Character Printer) :- यह एक बार में एक कैरेक्टर प्रिंट करता है इसे सीरियल प्रिंटर भी कहते हैं कैरेक्टर प्रिंटर 200 – 450 करेक्टर/ सेकंड प्रिंट करता है। 

b. लाइन प्रिंटर (Line Printer ) :- यह एक बार में एक लाइन प्रिंट करता है। यह तीव्र गति से कार्य करता है लाइन प्रिंटर 200 – 2000 कैरेक्टर / मिनट प्रिंट करता है। 

c. पेज प्रिंटर (Page Printer ) :- यह एक बार में पूरा पेज प्रिंट करता है यह विशाल डेटा का प्रिंट लेने में सक्षम है

a. इंपैक्ट प्रिंटर (Impact Printer ):- यह कागज,रिबन तथा कैरेक्टर तीनो पर एक-साथ चोट कर डेटा प्रिंट करता है। इंपैक्ट प्रिंटर भी कई प्रकार के होते हैं। 

i. डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matric Printer ) :- यह एक कैरेक्टर प्रिंटर है। जिसमें एक प्रिंट हेड होता है जो डॉट आगे-पीछे तथा ऊपर-नीचे घूमता है यह स्याही लगे रिबन पर चोट कर प्रिंट करता है यह 80 कॉलम तथा 132 कॉलम दो तरह की क्षमताओं में आता है इसमें प्रिंटिंग खर्च बाकी प्रिंटरों की अपेक्षा कम आता है लेकिन प्रिंट के गुणवत्ता और स्पीड दूसरे प्रिंटर के मुकाबले कम होती है इसमें एक बार में केवल एक रंग का प्रिंट लिया जा सकता है इसलिए इसे मोनो प्रिंटर भी कहते हैं। इसकी क्षमता को डी पी आई (Dot Per Inch ) में मापा जाता है।

ii. डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) :- यह भी कंप्यूटर प्रिंटर है। इसमें प्रिंट हेड की जगह डेजी व्हील लगा होता है जो प्लास्टिक या धातु का बना होता है व्हील के बाहरी छोर पर अक्षर बना होता है एक अक्षर को प्रिंट करने के लिए डिस को घुमाना पड़ता है जब तक पेपर तथा अक्षर सामने न आ जाये। तब तक हेमर व्हील पर चोट करता है तथा अक्षर रिबन को छोटकर कागज पर एक अक्षर प्रिंट करता है इससे ग्राफ या चित्र प्रिंट नहीं किया जा सकता है। यह शोर करने वाला तथा धीमी छपाई करता है। 

नन इंपैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer):– यह ध्वनि मुक्त प्रिंटर है क्योकिं इसमें प्रिंटिंग हेड कागज पर चोट नहीं करता है नन इंपैक्ट प्रिंटर भी कई प्रकार के होते हैं।

i. इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printer) :– यह तीव्र गति का पेज प्रिंटर है। यह इंजेक्ट तकनीक पर कार्य करता है। यह दो तरह के होते हैं। मोनो और रंगीन इसमें स्याही के लिए कार्ट्रिज (Cartridge) लगाया जाता है स्याही को जेट की सहायता से छिड़क कर करेक्टर तथा चित्र प्राप्त होता है इसकी गुणवत्ता तथा स्पीड दोनों कम होती है, तथा इसमें प्रिंटिंग खर्च भी ज्यादाआता है।

ii. लेजर प्रिंटर (Laser Printer) :– यह तीव्र गति का पेज प्रिंटर है। इसमें लेजर बीम की सहायता से ड्रम पर आकृति बनाया जाता है लेजर (बीम) ड्रम पर डालने के फलस्वरूप विद्युत चार्ज हो जाता है तब ड्रम को टोनर में लुढ़काया जाता है जिससे टोनर ड्रम के चार्ज भागों पर लग जाता है इसे ताप तथा दबाव के संयोग से कागज पर स्थानांतरित कर दिया जाता है जिससे प्रिंट प्राप्त होता है यह थर्मल तकनीक पर काम करता है यह दो तरह के होते हैं मोनो और रंगीन इसकी गुणवत्ता और स्पीड दोनों बाकी प्रिंटन की तुलना में काफी बेहतर होती है। 

iii. थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) :- थारमेक्रोनिक (Thermochromic ) कागज का उपयोग किया जाता है जब कागज थर्मल प्रिंट हेड से गुजरता है तो कागज के ऊपर स्थित लेप (Coating) उस जगह काला हो जाता है जहां यह गर्म होता है तथा प्रिंट होता है यह डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की तुलना में तीव्र तथा ध्वनि रहित होता है इसमें प्रिंट की गुणवत्ता अच्छी होती है। 

3. स्पीकर (Speaker) :- यह भी एक आउटपुट डिवाइस है जो अक्सर मनोरंजन के लिए उपयोग में आता है यह ध्वनि के रूप में आउटपुट देता है इसके लिए सीपीयू में साउंड कार्ड का होना आवश्यक है इसका उपयोग प्राय: संगीत या किसी तरह की ध्वनि सुनने में होता है।

4. प्लॉटर(Plotter) :– यह एक आउटपुट डिवाइस है इसका उपयोग ग्राफ प्राप्त करने के लिए होता है मुख्यत: इसका उपयोग इंजीनियर, चिकित्सक, वास्तुविद ,सिटी प्लानर आदि। करते हैं यह ग्राफ तथा रेखा चित्र जैसे आउटपुट प्रदान करता है। 

5. स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर (Screen Image Projector) :– या एक हार्डवेयर डिवाइस है जो बड़े सतह या पर्दे पर चित्रों को दिखाता है सामान्यत: इसका उपयोग प्रस्तुतियों और बैठकों (Presentation and Meeting) में किया जाता है जो एक बड़ी छवि के रूप में दिखाया जाता है जिसे बड़े हॉल में बैठे हर कोई देख सके।

इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस के अलावा कुछ डिवाइस ऐसे हैं जो इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस दोनों हैं

मॉडम (Modem) :– यह डाटा प्राप्त (Receive) तथा प्रेषित (Send) करता है।

टच स्क्रीन (Touch Screen) :– यह आउटपुट डिवाइस की तरह स्क्रीन पर इमेज या आउटपुट दिखता है तथा इनपुट डिवाइस की तरह स्क्रीन पर ऑब्जेक्ट के साथ (Intract) करने की अनुमति देता है।

हेडसेट्स (Headsets) :- इनमें स्पीकर और माइक्रोफोन दोनों होते हैं स्पीकर आउटपुट डिवाइस और माइक्रोफोन इनपुट डिवाइस की तरह कार्य करता है।

फैक्स (FAX) :- इनमें डॉक्यूमेंट को स्कैन करने के लिए स्कैनर और डॉक्यूमेंट प्रिंट करने के लिए प्रिंटर दोनों ही होती है इनके अलावा एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैक्स भेजने के लिए टेलीफोन लाइन, मॉडन तथा कंप्यूटर की आवश्यकता होती है।

मेमोरी (Memory)

मेमोरी कंप्यूटर का बुनियादी घातक है। यह कंप्यूटर का आंतरिक भंडारण (Internal Storage) क्षेत्र है। प्रोसेसिंग इकाई सीपीयू को प्रोसेस करने के लिए इनपुट डाटा एवं निर्देश (Instruction) चाहिए जो की मेमोरी में संग्रहित रहता है। मेमोरी में ही संग्रहित डेटा तथा निर्देश का प्रोसेस करता है तथा आउटपुट प्राप्त होता है अतः मेमोरी कंप्यूटर का एक आवश्यक अंग है।

डाटा प्रतिनिधित्व (Data Representation)

मेमोरी बहुत सारे सेल में बाटें होते हैं जिन्हें लोकेशन (Location) कहते हैं लोकेशन का एक अलग लेवल होता है जिसे एड्रेस (Address) कहते हैं सेल का उपयोग डाटा और निर्देश के संग्रह के लिए किया जाता है सारे डेटा और निर्देश कंप्यूटर में बाइनरी कोड के रूप में रहते हैं जिसे 0 तथा 1 से निरूपित किया जाता है 1 सर्किट के ऑन (On) स्थिति को दर्शाता है तथा 0 सर्किट के ऑफ़ (off ) स्थिति को दर्शाता है। लोकेशन में डेटा संग्रह करने को लिखना (Write) तथा लोकेशन से डाटा प्राप्त करने को पढ़ना(read) कहते हैं प्रत्येक लोकेशन में निश्चित बीट स्टोर की जा सकती है जिसे वर्ड लेंग्थ (Word Length) कहते हैं वर्ड लेंग्थ 8 ,16 ,32 या 64 बिट की हो सकती है बिट बाइनरी डिजिट का सबसे छोटी इकाई (Intercharge Code) में आठ बिट्स तथा ASCII (American Standard Code for Information Intercharge ) में सात बिट्स के समूह है।

मेमोरी के प्रकार (Type of Memory)

मेमोरी अक्सर सेमीकंडक्टर स्टोरेज जैसे (RAM) और कभी-कभी दूसरे तीव्र तथा अस्थाई रूप में जाना जाता है मेमोरी शब्द चिप(Chip) के रूप में प्रयोग होने वाले डाटा स्टोरेज को इंगित करता है परंतु स्टोरेज सामान्यत: उपयोग होने वाले स्टोरेज डिवाइस जैसे ऑप्टिकल डिस्क तथा हार्ड डिस्क इत्यादि मेमोरी और स्टोरेज मूल्य
विश्वसनीयता तथा गति आदि घटकों पर एक दूसरे से भिन्न है।

सेमीकंडक्टर या प्राथमिक या मुख्य मेमोरी या आंतरिक मेमोरी (Semiconductor or Primary or Main memory or Internal Memory)

प्राथमिक मेमोरी को अक्सर मुख्य मेमोरी भी कहते हैं जो कंप्यूटर के अंदर रहता है। तथा इसके डेटा और निर्देश का सीपीयू के द्वारा तीव्र प्रत्यक्ष से उपयोग होता है।

  1. रॉम (Rom) :- रॉम या रीड ओनली मेमोरी (Read Only Memory) एक ऐसी मेमोरी है जिसमें संग्रहित डेटा या निर्देश को केवल पढ़ा जा सकता है उसे नष्ट या परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। यह एक स्थाई (Non -volatile) मेमोरी होती है। जिसका उपयोग कंप्यूटर में डेटा को स्थाई रूप से रखने के लिए किया जाता है (ROM) मदरबोर्ड के ऊपर स्थित एक सिलिकॉन चिप है जीसके निर्माण के समय ही निर्देशों को इसमें संग्रहित कर दिया जाता है कंप्यूटर को स्विच ऑन करने पर रॉम (ROM) में इसमें संग्रहित निर्देश/ प्रोग्राम स्वत: क्रियान्वित हो जाता है कंप्यूटर को स्विच ऑफ करने के बाद भी रॉम में संग्रहित निर्देश /प्रोग्राम नष्ट नहीं होता है। रॉम में उपस्थित यह स्थाई प्रोग्राम बायोस (BIOS – Basic Input Output System) के नाम से जाना जाता है।
  2. प्रोम (PROM -Programmable Read Only Memory) :- यह भी स्थाई मेमोरी है। यूजर द्वारा यूजर एक बार प्रोग्राम निर्देश को बर्न (Burn) करने के बाद उसमें परिवर्तन नहीं हो सकता है। फिर वह साधारण रॉम की तरह व्यवहार करता है।  
  3. ई-प्रॉम (E.P.ROM -Erasable Programmable Read Only Memory) :- यह भी प्रॉम की तरह स्थाई मेमोरी है परंतु बर्निंग की प्रक्रिया(Burning Process) पराबैंगनी किरणों की सहायता से दोहराई जा सकती है इस पराबैंगनी ई-प्रॉम (Ultravoilet E-PROM) भी कहते हैं रीड ओनली मेमोरी में प्रोग्राम या डाटा प्री इंस्टॉल होते हैं। फार्मवेयर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का मेल कॉन्बिनेशन है रॉम, प्रोम और ई-प्रॉम जिनसे डाटा या प्रोग्राम संग्रहित रहते हैं।
  4. ई ई प्रॉम (E.E.PROM – Electrically Erasable Programmable Read Only Memory ) : – यह भी ई -प्रॉम की तरह स्थाई मेमोरी है परंतु बर्निंग प्रक्रिया विद्युत पल्स की सहायता से फिर से की जा सकती है।
  5. कैस मेमोरी (Cashe Memory) :- यह केंद्रीय प्रोसेसिंग इकाई (CPU) तथा मुख्य मेमोरी के बीच का भाग है जिसका उपयोग बार-बार उपयोग में आने वाले डाटा और निर्देशों को संग्रहीत करने में किया जाता है इससे मुख्य मेमोरी तथा प्रोसेसर के बीच गति अवरोध दूर हो जाता है क्योंकि मेमोरी से डेटा पढ़ने की गति सीपीयू के प्रोसेस करने की गति से काफी मंद होती है यह तीव्र महंगा तथा अपेक्षाकृत छोटा स्टोरेज फॉर्म है।

रैम (RAM) – Random Access Memory :- कंप्यूटर में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला यह मेमोरी है। यह अस्थाई (volatile) मेमोरी है, अर्थात अगर विद्युत सप्लाई बंद हो जाती है तो इसमें संग्रहित डेटा (सूचना) भी खत्म हो जाता है जैसे की नाम से ही प्रतीत होता है, रैंडम एक्सेस मेमोरी मतलब कि कहीं से भी डाटा को पढ़ा जा सकता है इसके लिए क्रमबंध पढ़ना आवश्यक नहीं है। इससे डाटा को पढ़ना तथा लिखना तीव्र गति से होता है रैम एक स्पेस है जहां डाटा क्षमता में उपलब्ध है रैम मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं।

डायनेमिक रैम (Dynamic RAM) :- इसके डेटा को रिफ्रेश करने की आवश्यकता नहीं होती है। तथा (इसकी गति डायनेमिक रैम से तेज होती है। )

द्वितीयक मेमोरी (Secondary memory)

इसके सहायक (Auxiliary) तथा बैंकिंग स्टोरेज (Backing Storage) मेमोरी भी कहते हैं। चूँकि मुख्य मेमोरी अस्थाई(Volatile) तथा सीमित क्षमता वाले होते हैं। इसलिए द्वितीयक मेमोरी को बड़ी मात्रा में स्थाई (Non-Volatile) डेटा मेमोरी के रूप में इस्तेमाल करते हैं ज्यादातर इसका उपयोग डेटा बैकअप के लिए किया जाता है केंद्रीय प्रोसेसिंग इकाई (CPU) को वर्तमान में जीस डेटा की आवश्यकता नहीं होती है। उसे द्वितीयक मेमोरी में संग्रह किया जाता है तथा जरूरत पड़ने पर इस मुख्य मेमोरी में कॉपी कर उपयोग किया जाता है आजकल उपयोग होने वाले मैग्नेटिक टेप तथा मैग्नेटिक डिस्क इसके मुख्य उदाहरण है।

  1. हार्ड डिस्क (Hard Disk) :- हार्ड डिस्क CPU के अंतर्गत डेटा को स्टोर करने की प्रमुख् डिवाइस होती है यह दूसरे डिस्क की तुलना में उच्च संग्रहण क्षमता, विश्वसनीयता तथा तीव्र गति प्रदान करता है चूँकि ये डिस्क एक बॉक्स (Module) के अंदर रीड तथा राइट हेड (Read and write head) के साथ सील रहता है। तो यह वातावरण तथा खरोच से भी सुरक्षित रहता है रीड तथा राइट हेड डिस्क के किसी भी ट्रैक के किसी भी सेक्टर पर सीधे पढ़ तथा लिख सकता है। जिससे डेटा को पढ़ना या लिखना तेज गति से होता है कंप्यूटर में अक्सर इसे सी (C) ड्राइव नाम दिया जाता है। कंप्यूटर के अंतर्गत इसी हार्ड डिस्क में सभी प्रोग्राम या डेटा इंस्टॉल्ड रहता है जिसका उपयोग हम अपनी जरूरत के अनुसार करते हैं हार्ड डिस्क 10GB,20GB,40GB,80GB आदि क्षमता में उपलब्ध है। डिस्क को ट्रैकों तथा सेक्टर में विभाजित किया जाता है जिसे फॉर्मेटिंग कहते हैं। 
  2. सीडी रॉम (CD ROM -Compact Disc Read Only Memory ) :- सी डी रॉम को ऑप्टिकल डिस्क भी कहा जाता है ऑप्टिकल डिस्क के ऊपर डेटा को स्थाई रूप से अंकित किया जाता है लेजर की सहायता से सीडी की सतह पर अतिसूक्ष्म गड्ढे बनाए जाते हैं सिडी में अंकित डेटा (Recording) मिट नहीं सकती है। रिकार्डेड डेटा को पढ़ने के लिए कम तीव्रता वाले लेजर बीम का उपयोग किया जाता है इसमें ट्रैक स्पाइरल(Spiral) होता है जिससे डेटा को हार्ड डिस्क की अपेक्षा तीव्र गति से पढ़ा नहीं जा सकता है साधारणत: सीडी रॉम की संग्रह क्षमता 640 MB होती है सीडी से डेटा प्राप्त करने के लिए सीडी ड्राइव तथा सीडी में डेटा को डालने के लिए सीडी राईट (CD-Write) की आवश्यकता होती है। इसे WORM (Write Once Read Many) डिस्क भी कहते हैं अर्थात वैसा सीडी जिस पर केवल एक बार लिखा जा सकता है ओर बार-बार पढ़ा जा सकता है अंकित डेटा में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
  3. सीडी-आर/डब्ल्यू (CD-Read/Write) :– सीडी-आर/डब्ल्यू (Compact Disc – rewritable ) भी ऑप्टिकल डिस्क है परंतु इसमें संग्रहित डेटा को मिटाया या परिवर्तित किया जा सकता है लेजर द्वारा सीडी में डेटा संग्रह सिडी के तहत पर सूक्ष्म गड्ढे के परावर्तन में परिवर्तन कर किया जाता है, तथा लिखे हुए सीडी में परिवर्तन करने के लिए फिर से लेजर का उपयोग किया जाता है इस प्रकार के सिटी का उपयोग करने के लिए सीडी-आर/डब्ल्यू ड्राइव की आवश्यकता होती है।
  4. मैगनेटिक टेप (Megnetic Tape) :- यह सबसे सफल बैंकिंग स्टोरेज माध्यम है वास्तव में हम लोग गानों के संग्रह तथा रिकॉर्डिंग के लिए जो कैसेट उपयोग करते हैं यह इस सिद्धांत पर कार्य करता है मैग्नेटिक टेप 2400 से 3600 फीट लंबा तथा पॉलिस्टर का बना होता है इसे रील में लपेटा जाता है पंच कार्ड तथा पेपर टेप की तुलना में इसमें विशाल डाटा संग्रहण किया जा सकता है टेप में डाटा को कितने बार भी लिखा मिटाया परिवर्तित किया जा सकता है तथा इसके लिए मैग्नेटिक टेप ड्राइव की आवश्यकता होती है सभी मैग्नेटिक टेप में दो रियल होते हैं एक रील के टेप जो पढ़ने या लिखने (Read or Write ) में उपयोग होता है फाइल रील (File Reel ) कहलाता है तथा दूसरा टेकअप रील (Take Up Reel ) कहलाता है।
  5. फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) :– ये मुख्यत: तीन आकारों 8 इंच, 5.25 इंच और 3.5 इंच में आता है धूल या खरौच से बचाने के लिए डिस्क प्लास्टिक के कवर (Cover) में बंद रहता है डेटा को पढ़ने या लिखने के लिए कवर के ऊपर बने छेद (Slot) का उपयोग किया जाता है | ज्यादातर डिस्क ड्राइव में रीड – राइट (Read/Write) हेड डिस्क के सतह से भौतिक संपर्क होते हैं। जो पढ़ने तथा लिखने के बाद हट जाते हैं जिसके फल स्वरुप टेप को कोई नुकसान नहीं होती है इसमें डेटा वृताकार ट्रैक पर लिखा जाता है यह एक वाह्य (External) मेमोरी है।
    फ्लॉपी डिस्क का डायरेक्ट एक्सेस माध्यम (Direct access Medium) के रूप में ज्यादा उपयोग होती है।
  6. डी वी डी (DVD) :- डी वी डी(Digital Versalite disc या Digital Video Disc का संक्षिप्त नाम है यह ऑप्टिकल डिस्क तकनीक के CD-रॉम की तरह होता है इसमें न्यूनतम 4.7 GB डेटा एक पूर्ण लंबाई की फिल्म संग्रहित किया जाता है डीवीडी समान्यत: फिल्मों और अन्य मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने का एक माध्यम है यह एकतरफा ( Single or Double sided ) होता है और हर तरफ में एक या दो परत में डेटा संग्रह कर सकता है। दो तरफ दो परत वाले DVD में 17 GB वीडियो,ऑडियो या अन्य जानकारीयों को संग्रह किया जा सकता है।
  7. पेन ड्राइव( Pen Drive) :– यह छोटे की रिंग (Key ring) के आकार का होता है। तथा आसानी से यु एस बी (USB -Universal Serial memory) संगत प्रणालियों के बिच फाइलों के स्थानांतरण तथा संग्रहण करने के लिए उपयोग होता है। यह भिन्न -भिन्न क्षमताओं में उपलब्ध है इसे पीसी के USB पोर्ट में लगाकर (Plug) उपयोग किया जाता है इसे फ्लैश ड्राइव भी कहते हैं। यह ई-ई प्रॉम मेमोरी का एक उदारहण है।
  8. फ्लैश मेमोरी ((Flash memory) :- इसे फ्लैश रैम भी कहा जाता है। इसको मिटाया तथा फिर से प्रोग्राम किया जा सकता है इसका उपयोग सेलुलर फ़ोन डिजिटल कैमरा डिजिटल सेट टॉप बॉक्स इत्यादि में होता है।

पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer)

पीसी पर्सनल कंप्यूटर (PC – Personal Computer) व्यक्तिगत उपयोग के लिए छोटा,अपेक्षाकृत कम खर्चीला डिजाइन किया गया कंप्यूटर है। माइक्रोप्रोसेस प्रौद्योगिकी पर आधारित है कंप्यूटर निर्माताओं को एक चिप पर पूरा सीपीयू डालने में सक्षम बनाता है व्यापार में इसका उपयोग शब्द संसाधन प्रबंधन आदि के लिए होता है घर में पर्सनल कंप्यूटर का उपयोग मनोरंजन के लिए ई-मेल देखने तथा छोटे-छोटे दस्तावेज तैयार करने के लिए होता है।

पर्सनल कंप्यूटर का विकास (Development of personal computers)

पीसी पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer) सबसे पहले 1970 के दशक में दिखाई दिया। 1970 में माइक्रो प्रोसेसर के विकास ने PC का विकाश किया। सर्वप्रथम सबसे लोकप्रिय पीसी एप्पल II 2077 में एप्पल कंप्यूटर के द्वारा लाया गया। 1981 में IBM(International Business Machine) ने अपना पहला पीसी IBM पीसी के नाम से लाया। IBM पीसी उस समय का सर्वाधिक लोकप्रिय पीसी था।

पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) के भाग या घटक (Parts or Components of a Personal Computer (PC)

एक पीसी आमतौर पर निम्नलिखित भागों से मिलकर बनता है। –

  1. सिस्टम यूनिट (System Unit) :-पीसी द्वारा किए जाने वाले सारे कार्य यहीं से नियंत्रित होते हैं इसके पीछे के भाग से की-बोर्ड, मॉनिटर, माउस तथा प्रिंटर आदि तारों के सहारे जुड़े रहते हैं हार्ड डिस्क ,सिडी ड्राइव तथा फ्लॉपी ड्राइव इत्यादि इसके अंदर जुड़े रहते हैं। जिन्हे इसे सॉफ्टवेयर के द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह पीसी का मुख्य भाग है। संरचना के आधार पर सिस्टम यूनिट दो प्रकार का होता है ।

     a. डेस्कटॉप टाइप (Desktop Type) :- सिस्टम यूनिट एक वर्गाकार बॉक्स की तरह होता है तथा मॉनिटर इसके ऊपर रखा जाता है।

     b.टावर टाइप (Tower Type ) :- जिसमें सिस्टम यूनिट एक टावरनुमा बॉक्स में होता है जो मॉनिटर के बगल में रखा जाता है। इसमें अतिरिक्त भंडारण उपकरणों को

         स्थापित करना आसान होता है।

सिस्टम यूनिट के मुख्य भाग (Main parts of System Unit )

(i) सीपीयू (CPU):- इसे प्रोसेसर या माइक्रोप्रोसेसर भी कहते हैं यह पीसी से जुड़े विभिन्न उपकरणों को नियंत्रित करता है यह कंप्यूटर द्वारा प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है इसके तीन भाग होते हैं –

  • मुख्य मेमोरी (Main Memory) :- वर्तमान में उपयोग हो रहे डेटा या निर्देशों को संग्रहित करता है।
  • अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट (Arithmetic Logic Unit ) :- अंकगणितीय तथा तार्किक गणनाओं में इसका उपयोग होता है यहां सभी प्रकार की गणना की जा सकता है। 
  • कंट्रोल यूनिट (Control Unit) :- यह कंप्यूटर द्वारा हो रहे सारे कार्यों को नियंत्रित करता है। 

(ii) मदरबोर्ड (Mother Board) :- यह प्लास्टिक द्वारा हो रहे सारे कार्यों को नियंत्रित करता है धातु द्वारा निर्मित महीन धागे के समान संरचनाएँ होती है इस धातु के संरचना को बस(BUS) कहते हैं जिसके द्वारा विभिन्न संकेतों या सूचनाओं का आदान- प्रदान विद्युत प्रवाह के रूप में होता है यह सीपीयू को दूसरे पुर्जो से जोड़ता है मदरबोर्ड कंप्यूटर के बुनियाद है कंप्यूटर में प्रोसेसर, विभिन्न प्रकार के कार्ड जैसे डिस्प्ले कार्ड ,साउंड कार्ड आदि मदरबोर्ड पर ही स्थापित किए जाते हैं यह कंप्यूटर का मुख्य पटल होता है। 

(iii) रैम (RAM) :- मदरबोर्ड पर रैम लगाने का स्थान (Slot) बना रहता है। जिसमें हम अपनी आवश्यकता अनुसार रैम लगा सकते हैं यह एक कार्यकारी मेमोरी है आणि यह तभी काम करता है जब हम कंप्यूटर पर काम कर रहे होते हैं कंप्यूटर बंद होने पर इसमें संग्रहित सभी सूचनाओं नष्ट हो जाती है यहां सूचनाओं को अस्थाई तौर पर रखा जाता है। 

(iv) रोम (ROM) :- रोम अर्थात रीड ओनली मेमोरी जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इस मेमोरी में संग्रहित सूचनाओं को केवल पढ़ा जा सकता है उसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता है कंप्यूटर बंद रहने पर भी रॉम में सूचनें संग्रहित रहती है ओर नष्ट नहीं होती है।

(v) मैथ कोप्रोसेसर (Math Coprocessor ) :- यह कंप्यूटर का दूसरा सहायक प्रोसेसर है इसका उपयोग वैज्ञानिक गणनाओं और बीजगणितीय कार्यों के चल बिंदु (Floating Point) गणनाओं में होता है। 

(vi) वीडियो कार्ड (Video Card) :- इसे ग्राफिक एक्सेलेटर कार्ड, डिस्पले एडेप्टर या ग्राफिक कार्ड भी कहा जाता है। यह हार्डवेयर का भाग है, जिसका कार्य स्क्रीन पर चित्र यह दृश्य प्रदर्शित करना है

(vii) साउंड कार्ड (Sound Card) :- अधिकतर पीसी मल्टिमीडिय के लिए बने होते हैं साउंड कार्ड मदरबोर्ड पर एक स्टॉल में लगा रहता है या बोर्ड में ही बना होता है साउंड कार्ड की सहायता से संगीत, भाषण या कोई भी ध्वनि को सुना जा सकता है। 

(viii) विधुत आपूर्ति (Power Supply) :- पीसी के पीछे जहां पावर कार्ड जोड़ा जाता है। वह विधुत आपूर्ति (Power Supply) है। यह AC वोल्टेज को कंप्यूटर के विभिन्न घटकों के लिए उपयुक्त DC वोल्टेज में परिवर्तित करता है। कंप्यूटर के घटकों को +-5 वोल्ट की आवश्यकता होती है। 

(ix) स्पीकर(Speaker) :- सिस्टम यूनिट के अंदर कुछ ध्वनि संकेत के लिए स्पीकर लगा होता है जैसे कंप्यूटर ऑन करने पर स्क्रीन ऑन होने के पहले बीप (beep) ध्वनि स्पीकर द्वारा उत्पन्न होता है। 

(x) टाइमर (Timer) :- यह मदरबोर्ड पर लगा आंतरिक घड़ी है जो बैटरी से चलती है तथा कंप्यूटर के ऑपरेशनों को सिक्रोनाइज करने के लिए इलेक्ट्रिकल पल्स पैदा करती है तथा इसके स्पीड की गाना गीगा हर्टज में की जाती है।

(xi) एक्सपेंशन स्लॉट (Expansion) :- यह कंप्यूटर के मदरबोर्ड में निर्धारित वह स्थान है जहां भविष्य में किसी अन्य उपकरण को जोड़ने के लिए स्लॉट बना होता है।

(xii) सिस्टम यूनिट के सामने के भाग में पावर स्विच, रिसेट बटन, फ्लॉपी ड्राइव तथा सीडी
ड्राइव होता है। पावर स्विच सिस्टम यूनिट में विद्युत आपूर्ति को ऑन या ऑफ करने के लिए प्रयोग होता है। रिसेट बटन सिस्टम में विद्युत आपूर्ति को बंद किये बिना फिर से ऑन करने के लिए होता है यह सिस्टम हैंग करने के स्थिति में प्रयोग होता है फ्लॉपी ड्राइव तथा सीडी ड्राइव क्रमशः फ्लॉपी तथा सीडी के रीड और राइट करने के लिए प्रयुक्त होता है।

(xiii) सिस्टम यूनिट के पीछे भाग में विभिन्न बाह्म यंत्रों(Accessories ) जोड़ने के लिए पोर्ट और जैक बने होते हैं ये निम्नलिखित होते हैं 

      a.पावर सॉकेट (Power socket)

      b.की-बोर्ड पार्ट (Keyboard part)

      c.सीरियल पोर्ट (Serial port)

      d.पैरेलल पोर्ट (Parallel port)

      e.ऑडियो जैक (Audio jack)

      f.नेटवर्क पोर्ट (Network port)

      g.यू एस बी पोर्ट (USB -Universal Serial Bus Port port)

      h. SCSI पोर्ट (SCSI – Small Computer System Interface Port)

2. हार्ड डिस्क (Hard Disc) :- यह विशाल क्षमता युक्त स्थाई भंडारण उपकरण है। सॉफ्टवेयर, प्रोग्राम एवं डेटा इसमें संग्रह कर रखते हैं तथा आवश्यकतानुसार कंप्यूटर उसका उपयोग करता है यह कंप्यूटर में लगा स्थाई डेटा स्टोर करने का उपकरण है। .

3. सीडी ड्राइव (CD-Drive) :- सीडी से डाटा पढ़ने या लिखकर स्टोर करने के लिए इसकी आवश्यकता होती है। 

4. फ्लॉपी ड्राइव (Floppy drive) :- फ्लॉपी को पढ़ने या लिखने के लिए इसका आवश्यकता होती है। 

5. मॉनिटर (Monitor) :- यह आउटपुट उपकरण है जिसके द्वारा मानव तथा कंप्यूटर के बीच संवाद होता है यह सी पी यु से जुड़ा रहता है।

6. माउस (Mouse) :- यह इनपुट उपकरण है। यह दो बटन, तीन बटन या ऑप्टिकल होते हैं यह सीपीयू से कार्ड के साथ जुड़ा रहता है। 

7. की-बोर्ड ( Keyboard ) :- पीसी में डेटा को इनपुट करने के लिए लगा उपकरण जिसके द्वारा हम अक्षरों एवं अंकों को इनपुट के रूप में डालते हैं साधारण की-बोर्ड में 104 (Key) होते हैं पर IBM पीसी के की-बोर्ड में 83 (Key) होते हैं। 

8. स्पीकर (Speaker) :- यह एक आउटपुट उपकरण है जो कंप्यूटर द्वारा प्रदत्त आउटपुट को कागज पर प्रिंट करता है या हार्ड कॉपी प्रदान करता है। 

9. प्रिंटर (Printer) :- यह एक आउटपुट उपकरण है जो कंप्यूटर द्वारा प्रदत आउटपुट को कागज पर प्रिंट करता है। या हार्ड कॉपी प्रदान करता है। 

10. स्कैनर (Scanner) :- वह उपकरणों जो इमेज को स्कैन कर बाइनरी कोड में बदलकर कंप्यूटर में इनपुट करता है।

11. सीडी रॉम ड्राइव (CD-ROM DRIVE) :- सीडी से डेटा पढ़नें में प्रयुक्त किया जाने वाला यंत्र है। 

12. सीडी राइटर( CD-Writer) :- सीडी से डेटा पढ़नें एवं लिखने दोनो में प्रयुक्त किया जाने वाला यंत्र है। 

13. मॉडेम (MODEM) :- यह Modulator – Demodulator का संक्षिप्त नाम है। यह टेलीफोन लाइन के द्वारा कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ता है तथा डेटा को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजता है। 

14. यु पी एस (UPS-Uninterruptible Power Supply ) :- यह बैटरी से संचालित उपकरण है जिसके द्वारा कंप्यूटर में अनवरत विधुत आपूर्ति बनी रहती है। कंप्यूटर के अचानक बंद हो जाने से वर्तमान में हो रहे कार्य नष्ट हो सकते हैं। परन्तु यु पी एस के उपयोग से ऐसा होने से बचाया जाता है। 

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